डायन : समाज का एक चेहरा

अभी कुछ दिनों पहले मैने पढ़ा था कही हमारे देश में डायन रहती है| मैने काफ़ी रिसर्च की, पढ़ा और जानने की कोशिश की आख़िर ये डायन की परिभाषा क्या है हमारे समाज में? किसी का पति मर जाए आचनक शादी के बाद, तो उसकी बीवी डायन हो जाती है, किसी इलाक़े में सूखा पढ जाए तो लड़की डायन हो जाती है| कैसे एक विधवा को डायन करार दिया जाता है, ये तो सोचने की बात है| आख़िर ऐसा क्यों होता है? क्या इन सब के पीछे समाज अपनी कमियों या अपने बुरे कर्मों को एक औरत पर डालकर अच्छा बना रहना चाहता है?

मुझे ये तो नही पता की डायन की सही परिभाषा क्या है, परंतु मैने या मेरे किसी दोस्त ने या जानने वाले ने कभी ऐसा नहीं देखा, तो मैं ये सब नही मनती|

मेरा एक सवाल है अपने समाज से और इस समाज के ठेकेदारों से, अगर एक औरत बुरा कर सकती है या डायन बन सकती है तो एक पुरुष क्यों नही? क्या उनके साथ बुरा नही होता, या वो किसी के साथ बुरा व्यवहार नहीं करते? अगर एक औरत विधवा हो जाती है तो या तो हमारे समाज के ठेकेदार उसे डायन कहते हैं या उसे विधवा धर्म अपनाने को कहते हैं जैसे की सात्विक खाना खा, ताकि मॅन शांत रहे और नियमों का पालन कर, सफेद कपड़े पह्न, ज़मीन पर सो और भी ना जाने कितनी कुरीतीया अपनाने को कहते है और अगर वो नही करती तो वो डायन हो जाती है| ये सारे नियम पुरुषों के लिए क्यों नहीं हैं, क्यों उसकी दूसरी, तीसरी शादी कर खुश रखते हैं, क्यों वो सात्विक खाना नही खाते, क्यों ज़मीन पर नहीं सोते? ये कुछ सवाल है जिनका जवाब आप खोजते खोजते पागल हो जाओगे परंतु आप समझ नहीं पाओगे आख़िर ये कैसा समाज है की एक जननी को एक डायन बनाने में हमारा समाजबिल्कुल देर नहीं लगाता| इससे आप विडमना कहो या हमारी मूर्खता परंतु ये सच है, कुछ भी ग़लत हो तो औरतों पर डाल दो! बलात्कार की शिकार औरत, दहेज प्रथा की शिकार औरत, लिंग बेधन की शिकार औरत, भ्रूण हत्या की शिकार औरत, फिर भी औरत बदनाम! उसके दिल की उसके मन की किसी ने ना जानी, प्रंतु शोषित होना ही सत्य है उसकी जिंदगी में|

ये तो हुए हमारे देश के गाँव की बाते, पर एक और अद्भुत कहानी हमारी सोसाइटी की| आज कल दुनिया बहुत छोटी हो गयी है, हम एक सेकेंड में विदेशो में बात करते है, घूमते है, पर अभी 2 दिन पहले ट्विटर पर इंडिया वर्ल्ड कप से बाहर हुई इंडियन टीम की हार का टीकरा अनुष्का शर्मा के सिर फूटा. अरे लोगो खेले विराट कोहली नही, अनुष्का ने क्या किया? वैसे तो ये ही ग़लत है की आप क़िस्सी एक बंदे को ग़लत कहे, ये टीम की हार है ना की विराट कोहली की और अनुषा शर्मा की| हराने की बात ये है टीम से किसी को कोई प्राब्लम नहीं पर अनुष्का शर्मा से है| अगर अनुष्का शर्मा के जगह विराट की माँ या भाई या पापा मैच देखने जाते तो क्या यही होता? गर्लफ्रेंड होना भी गुनाह है हमारे देश में? हार का सेहरा अनुष्का को पहनाकर उनको गालियाँ देना क्या यही सिखाता है हमारा समाज, क्या यही है हमारा धर्म और हमारे नियम?

लोगों समाज के नाम पर ये सब छोढ़ दो और एक अच्छे इंसान बनने की कोशिश करोगे तो शायद किसी दिन हम अपने देश पर और अपने लोगों पर गर्व कर पाएँगे नहीं तो हमें पीछड़ने से कोई नही बचा सकता!!!

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3 thoughts on “डायन : समाज का एक चेहरा

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