पाक हिरासत में IAF पायलट की पुष्टि, भारतीय पायलट का मामला जिनेवा संधि के तहत आएगा- पायलट अभिनंदन को दुश्मन देश में मिलेंगी सुविधाएं

भारतीय वायुसेना (IAF) के पायलट की पाकिस्तान के कब्जे में होने की पुष्टि के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने दिन में दूसरी बार हाइलेवल मीटिंग बुलाई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के घर पर बुलाई गई इस बैठक में तीनों सेना के प्रमुख और एनएसए (NSA) अजित डोभाल मौजूद हैं. भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव के बीच पीएम नरेंद्र मोदी ने बुधवार सुबह भी हाइलेवल बैठक बुलाई थी. बता दें कि पीएम मोदी के घर पर चल रही यह बैठक लगभग 1 घंटे 20 मिनट तक चली.

भारतीय वायु सेना के पायलट को पाकिस्तान द्वारा बुधवार को हिरासत में लेने का मामला 1929 की जिनेवा संधि के तहत आएगा। उनके विमान को गिराए जाने के बाद पाकिस्तान ने उन्हें हिरासत में ले लिया।

 

पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर ने ट्विटर पर कहा, ” पाकिस्तानी सेना की हिरासत में सिर्फ एक पायलट है। पायलट के साथ सैन्य आचरण के मुताबिक सलूक किया जा रहा है।

 

युद्ध बंदियों का सरंक्षण (पीओडब्ल्यू) करने वाले नियम विशिष्ट हैं। इन्हें पहले 1929 में जिनेवा संधि के जरिए ब्यौरे वार किया गया था और द्वितीय विश्व युद्ध से सबक सीखते हुए 1949 में तीसरी जिनेवा संधि में उनमें संशोधन किया गया था।

 

नियमों के मुताबिक, जंगी कैदी का संरक्षण का दर्जा अंतरराष्ट्रीय सशस्त्र संघर्षों में ही लागू होता है। संधि के मुताबिक, युद्ध बंदी वह होते हैं जो संघर्ष के दौरान आमतौर पर किसी एक पक्ष के सशस्त्र बलों के सदस्य होते हैं जिन्हें प्रतिद्वंद्वी पक्ष अपनी हिरासत में ले लेता है।

किन्हीं दो देशों के बीच चाहे जितनी भी दुश्मनी क्यों न हो अगर उनका कोई सैनिक एक दूसरे का युद्धबंदी बन जाता है तो उस पर कुछ इंटरनेशनल प्रोटोकॉल लागू होते हैं. जिसके तहत न तो उससे पूछताछ की जबरदस्ती की जा सकती और न ही धमकी दी जा सकती है. खाने-पीने का इंतजाम करना उन्हें बंधक बनाकर रखने वालों की जिम्मेदारी होगी. युद्धबंदी को वही मेडिकल सुविधाएं भी हासिल होंगी जो उसके सैनिक को मिलती हैं. जेनेवा कन्वेंशन के तहत उसे ये अधिकार हासिल होगा. भारत ने पुष्टि की है कि भारतीय वायुसेना के पायलट अभिनंदन पाकिस्तान के कब्जे में हैं.

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