Sunday Special: सिर्फ़ राक्षस बस्ते हैं यहाँ ? – Crime in Delhi

 

 Sunday Special: From Crime In Delhi Team

crime against child

बच्चे -मन के सच्चे… पर क्या ये सच्चे बच्चे सच्चाई से बेख़बर हैं? दादी, नानी की गोद से अभी बाहर भी नही आई इनकी मासूमियत, परंतु दुनिया के गंदे लोगों की गंदी नज़र से क्या ये बच पाएँगे? क्या ये बच्चे आजकल की दुनिया को समझने के लिए तैयार हैं?

क्या, हमारे सामाज में ये सुरक्षित हैं? शायद इन्हें तो बलात्कार शब्द का मतलब पता भी नहीं होगा, पर रोज़, हर रोज़, हर घंटे, हर मिनट ये बलात्कार, छेड़खानी जैसे शब्द सुनते हैं…उनका शिकार होते हैं, परंतु क्या ये कभी समझ पाते हैं की इनके साथ क्या हुया… इनकी मासूमियत क्या इन्हें ये एहसास दिलाती है की किसी ने मासूमियत की दीवार फाँद कर इनका शोषण किया? पर इन्हें एहसास भी नहीं की ये किसी की हवस का शिकार हो रहे हैं|

उन माँ, बाप को कितना धक्का लगता होगा जब ये पता चलता है की उनके मासूम बच्चों के साथ ऐसा दुष्कर्म हुआ है| उन बच्चों को कैसे एहसास होगा की वो आज शिकार हुए हैं एक हवस का|

एक बेटी होना गुनाह बन गया यहाँ हमारे समाज में| आज दिन पर दिन, उनका शारीरिक शोषण होता है इस समाज में तो क्या यही कलयुग है? और फिर क्यों ना हो हर लड़की का एक रावण जैसा भाई, उसकी रक्षा के लिए?

आज हमारी बेटी, अपने ही लोगों के बीच सुरक्षित नही| क्या रिश्ते नाम के ही रह गये हैं? हम अपनी बच्चियों पर बुरी नज़र कैसे डाल सकते हैं? और अपनी ही क्यों, बच्चियाँ तो बच्चियाँ होती है, चाहे किसी की भी हो|

इसका मतलब ये हुआ ना हमारे सामाज की परवरिश में कमी है? हमें सिर्फ़ एक मनुष्य शरीर चाहिए अपनी भूक मिटाने के लिए| कैसा सामाज है ये, कैसा इंसान है ये और कैसी मानसिकता है ये?

और आज हम रोज़ अख़बारों में, खबरों में यही पड़ते है, की आज रोहतक में बलात्कार, आज दिल्ली में और देश के हर हिस्से में बलात्कार, छेड़खानी रोज़ का काम हो गया है| परंतु क्या हमारी सरकार, हमारा क़ानून और हम लोग हमारी बेटिओं के साथ हैं?

एक बहुत बड़ा सवाल आज हमारे सामने खड़ा है की दरअसल हमारे सामाज में बढ़ रहे जुर्म के लिए ज़िम्मेदार है कौन? ज़रा सोचिए…

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6 thoughts on “Sunday Special: सिर्फ़ राक्षस बस्ते हैं यहाँ ? – Crime in Delhi

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