ड्रग्स के दुरूपयोग एवं अवैध व्यापर के विरुद्ध अंतर्राष्ट्रीय दिवस, “लिसेन फर्स्ट” थीम के साथ

अवैध तस्करी सिर्फ दवाओं के बारे में नहीं बल्कि लोगों के बारे में भी है। यह एक समाज को ड्रग फ्री बनाने की मुहीम है. जिसकी नीव संयुक्त राष्ट्र की असेंबली में 26 जून 1987 को रखी गयी थी, और इसी से इसका नाम इंटरनेशनल डे अगेंस्ट ड्रग एब्यूज एंड इल्लिसित ट्रैफिकिंग रखा गया. समाज को ड्रग फ्री बनाना ही इस मुहीम का मकसद है. संयुक्त राष्ट्र ने जागरूकता बढ़ाने के लिए और ड्रग्स की अवैध तस्करी के खिलाफ लड़ने के लिए आधिकारिक तौर पर बनाया था।

ड्रग एडिक्शन क्या है?

यह हमे हमेशा समझना चाहिए, की ये ड्रग एडिक्शन कहा से आया? रोजमर्ह और हमे स्वस्थ करने वाली दवाइयों में बहुत मामूली सा अनुपात ड्रग्स का उपयोग किया जाता है. क्युकी वो उस बीमारी की जरुरत होता है. लेकिन जब इंसान इसी ड्रग्स के अनुपात को बड़ी मात्रा में लेना शुरू कर देता है, तो यह देखते ही देखते नशे की लत का कारण बन जाता है। नशीली दवाओं के दुरुपयोग को रोकने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय समाज का कार्रवाई करना और सहयोग देना इस समाज के लिए अति आवश्यक है।

ड्रग्स एंड क्राइम पर यूएनओ द्वारा 2017 में जारी विश्व ड्रग रिपोर्ट के मुताबिक, विश्व के लगभग 5.3% (अरबों की एक चौथाई) युवकों ने वर्ष 2015 में कम से कम एक बार ड्रग्स का उपयोग किया है। इस प्रतिशत में से लगभग 0.6% युवक नशीली दवाओं की लत से पीड़ित हैं, जिनमें नशे की लत और दवा डिपेंडेंस भी शामिल हैं।

दुनिया भर में लगभग 200 मिलियन लोग अवैध ड्रग्स जैसे कैनाबीस, कोकीन, हेलुसीनोजेन और सेडेटिव हिप्नोसिस का उपयोग कर रहे है। ड्रग पॉलिसी के अनुसार ड्रग्स के प्रयोग में कुछ सीमाएं होती है, लेकिन जैसा की हम सब जानते ही है, किसी भी चीज़ की अति, आपको अंत तक ले जाती है. वैसे ही ड्रग्स की अधिकता उसे कई अवैध उपयोग तक ले जा रही है. और यही अवैध उपयोग मानव जाति के लिए गले की हड्डी साबित हो रहा है. और इसके शिकार, युवा पीढ़ी से लेकर बच्चे तक हो रहे है. इसे ही ध्यान में रखते हुए, देशों ने ड्रग्स के नियंत्रित उपयोग के लिए वर्ल्ड ड्रग कण्ट्रोल सिस्टम शुरू किया.

ड्रग के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस के उद्देश्य:

ड्रग्स एंड क्राइम (यूएनओडीसी) पर संयुक्त राष्ट्र ने इस दिवस को आधिकारिक तौर पर ड्रग्स के दुरूपयोग और उनके अवैध बाजार से जुड़े खतरों पर प्रकाश डालने हेतु कार्य करने को प्रेरित किया है.

इस दिवस का मुख्य उद्देश्य लोगो को आर्थिक और सांस्कृतिक नुकसान के बारे में जागरूकता फैलाना है. और उनके सामने, इतिहास के ऐसे तथ्य पेश करना, जिसकी वजह से देशो को आर्थिक और सामाजिक खतरों का सामना करना पड़ा. लगभग 100 वर्षों से हमारा समाज इस बुराई को झेल रहा है. लोगो के बच्चे ही नहीं अपितु घर, व्यवसाय तक डूब गए ड्रग्स के चक्कर में. इतिहास उठाकर देखेंगे तो मालूम चलेगा बैटल ऑफ़ शंघाई जो वर्ष 1937 में शुरू हुई ड्रग्स के दुरूपयोग और उनके अवैध बाजार का ही नतीजा था.

ड्रग दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस के लिए वर्ष 2018 थीम:

“लिसेन फर्स्ट”, इस वर्ष 2018 की थीम है. यह ड्रग्स का दुरूपयोग को रोकने और बच्चों, युवाओं, परिवारों और समुदायों के कल्याण के लिए प्रभावी निवेश करने की पहल है। इस विषय पर प्रकाश डाला गया है कि “बच्चों और युवाओं को सुनना, उनका समर्थन करने और उनकी सहायता करने का पहला कदम है ताकि वे सुरक्षित और स्वस्थ हो जाएं”।

भारत में दुरूपयोग की जाने वाली सामान्य ड्रग्स:

ड्रग्स विभिन्न रुपोँ मेँ मिलती हैँ और अनेकों प्रकार से ली जा सकती हैँ। कुछ वैध होती हैँ और कुछ नहीँ होतीं। नशीले पदार्थोँ का दुरूपयोग अनेक प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ पैदा कर सकता है और अति गंभीर मामलोँ मेँ मृत्यु भी हो सकती है।

कोकीन, मेथाएम्फेटामिन, एम्फेटामिन, रिटालिन, साइलर्ट, इन्‍हेलेंट जैसे ड्रग्स भारत में प्रयोग में लाये जाते है.

इन्‍हेलेंट को सूंघा या मुंह से खींचा जाता है और ये प्रयोगकर्ता को तुरंत परिणाम देते हैं। यह तुरंत परिणाम अचानक होने वाली मानसिक क्षति मेँ भी परिवर्तित होते हैँ। जब इन्‍हेलेंट को लिया जाता है, तो शरीर को आक्सीजन की कमी हो जाती है जिससे हृदय गति तेज हो जाती है। हमेँ लीवर, फेफड़े और किडनी संबंधी समस्याएँ, सूंघने की शक्ति पर प्रभाव, चलने मेँ मुश्किल और अनिश्चितता जैसी समस्‍याएं होती हैं।

ये नशीले पदार्थ शारीरिक नाड़ी तंत्र को तेज कर देते हैं और अलग तरह की शक्ति का एहसास करवाते हैँ। इन्‍हें अपर भी कहा जाता है क्योंकि यह आपको पूरी तरह जगाने की क्षमता रखते हैं। उत्‍तेजकों का प्रभाव अवसादकों से उल्टा होता है। ऐसे नशीले पदार्थोँ का लगातार प्रयोग अत्‍याधिक नकारात्मक प्रभाव डालता है।

इन नशीले पदार्थों के परिणामों में उत्‍साह, अनिश्चितता और याददाश्‍त संबंधी समस्‍याएं होना । उत्कंठा, बढ़ी हुई दिल की धड़कन और साथ-साथ ही लड़खड़ाना और प्रतिक्रिया का धीमा समय होना।

ग्‍लू, पेंट थिनर, गैसोलीन, लाफिंग गैस, एयरोसोल स्‍पे, केनाबीनाएड्स से उत्‍साह, अनिश्चितता और याददाश्‍त संबंधी समस्‍याएं होती है. उत्कंठा, बढ़ी हुई दिल की धड़कन और साथ-साथ ही लड़खड़ाना और प्रतिक्रिया का धीमा समय होना।

हशीश, मारीजुआना, अवसादक शरीर के केंद्रीय नाड़ी तंत्र के चालन को धीमा कर देते हैँ। इन ड्रग्‍स को “डाउनर” भी कहा जाता है क्योंकि यह शरीर को धीमा कर देते हैँ और तनावरहित होने का एहसास करवाते हैँ। अवसादक तनाव और गुस्से से निजाद दिलाने वाले नुस्खे के रुप मेँ उपलब्ध हैं, हालांकि उनींदापन अक्‍सर ही एक अतिरिक्‍त प्रभाव होता है। इन ड्रग्‍स से होने वाला ‘तनावमुक्ति’ का एहसास शरीर को अनुभव होने वाला एक स्‍वस्‍थकर एहसास नहीं होता।

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