सेक्स बिकता है, ठेलो पर नहीं, गली कुच्छो पर नहीं, बिकता है तो चाद्दर के नीचे, कानो की फुसफुसाहट में, आँखों के इशारो में. हमारे देश में संस्कृति के नाम पर सेक्स की चर्चा करना भी वर्जित मानते है. परन्तु ये एक व्यंग्य बनकर रह गया है. सबको सेक्स करना […]

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